Posted by: bazmewafa | 12/30/2019

ऐ नये साल बता, तुझ में नयापन क्या है—फैज लुध्यानवी

ऐ नये साल बता, तुझ में नयापन क्या है……..फैज लुध्यानवी

 

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ऐ नये साल बता, तुझ में नयापन क्या है

हर तरफ ख़ल्क ने क्यों शोर मचा रखा है

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रौशनी दिन की वही, तारों भरी रात वही

आज हमको नज़र आती है हर बात वही

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आसमां बदला है अफसोस, ना बदली है जमीं

एक हिन्दसे का बढ़ना कोई जिद्दत तो नहीं

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अगले बरसों की तरह होंगे करीने तेरे

किसे मालूम नहीं बारह महीने तेरे

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जनवरी, फरवरी और मार्च में पड़ेगी सर्दी

और अप्रैल, मई, जून में होवेगी गर्मी

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तेरे मान-दहार में कुछ खोएगा कुछ पाएगा

अपनी मय्यत बसर करके चला जाएगा

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तू नया है तो दिखा सुबह नयी, शाम नई

वरना इन आंखों ने देखे हैं नए साल कई

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बेसबब देते हैं क्यों लोग मुबारक बादें

गालिबन भूल गए वक्त की कडवी यादें

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तेरी आमद से घटी उमर जहां में सभी की

फैज नयी लिखी है यह नज्म निराले ढब की

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हिन्दसे=अंक,नंबर


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