Posted by: bazmewafa | 04/23/2007

तु__ मशरीक के शाईरे आजम डॉ.अलल्लामा सर मुहम्मद ईक़बाल की एक शाहकार नज्म का थोडा हिस्सा.

(उर्दु नजम की हिन्दी रस्मुल खत मे तब्दीली)

                तु!

क्युं चमन में बे सदा मिस्ले रमे शबनम है तु!
लब कुशां हो जा सरुदे बरबते आलम है तु!

आशना अपनी हक़ीक़त से हो दहकां जरा
दानातु,खेती भी तु,बारां भी तु हासिल भी तु!

 आह कीसकी जुस्त्जु आवारह रखती है तुझे
राहतु, रह रव भीतु,रहबर भीतु,मंझिल भे तु!

कांपता है दिल तेरा अंदेशए तुफांसे कया?
नाखुदा तु,बहर तु,कश्तीभी तु, साहिलभी तु!

देख आकर कुचए चाके गरिबांमे कभी
क़ैस तु, लैलाभी तु,सहराभी तु, महमिलभी तु!

वाए नादानी के तु मोहताजे साकी हो गया
मैभी तु,मीनाभी तु,.साक़ीभी तु,महेफिलभी तु!

शोला बन कर फुंक दे खाशाके गयरुल्लाह को
खौफे बातिल कया करे गारत गरे बातिल भी तु.

___डॉ.अल्लामा मुहंमद ईक़बाल.


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