Posted by: bazmewafa | March 18, 2008

शुक्र अल्लाह का- अकबर इलाहाबादी

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शुक्र अल्लाह का

उर्दू हझल

साँस लेते हुये भी डरता हूँ
ये न समझें कि आह करता हूँ

बहर-ए-हस्ती में हूँ मिसाल-ए-हुबाब
मिट ही जाता हूँ जब उभरता हूँ

इतनी आज़ादी भी ग़निमत है
साँस लेता हूँ बात करता हूँ

शेख़ साहब खुदा से डरते हो
मैं तो अंग्रेज़ों ही से डरता हूँ

आप क्या पूछते हैं मेरा मिज़ाज
शुक्र अल्लाह का है मरता हूँ

ये बड़ा ऐब मुझ में है ‘अकबर’
दिल में जो आये कह गुज़रता हूँ

           - अकबर इलाहाबादी

हुबाब=પરપોટો

હઝલ _ 13

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